विचारों का विरोधाभास ही शायद विचारों की सम्र्ध्यता का एक बहुत सशक्त माध्यम है. रोबर्ट ग्रीन की mastery एक बहुत ही शानदार किताब है, जो जीवन में श्रेष्टता के सिद्धांत को परिपादित करती है. डार्विन जैसे अनेक उदाहरणों से भरी ये किताब एक दिशा दिखाती है, कि कैसे आप अनंत ऊचाइयों को छू सकते हैं. रोबर्ट ग्रीन ने एक एक ऐसी फिलोसोफी की बात की है, जहां हमें एक मास्टर बनने के लिए एक ही दिशा में अनवरत साल दर साल मेहनत करनी होती है.
लेकिन पिछले कुछ दिनों से मैंने एलोन मस्क ( पे पाल, टेस्ला, स्पेस X का मालिक) को जानना और पढना शुरू किया है और जितना उसे पढ़ रहा हूँ उतना ही दिमाग घूमता जा रहा है. एक इंजीनियर, इन्वेन्टर और एक्स्प्लोरर जिसकी उम्र अभी मात्र ४५ वर्ष है और जो अरबों की सम्पत्ति का मालिक है. सॉफ्टवेयर, एनर्जी, ट्रांसपोर्टेशन, और एरो स्पेस के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता पाने वाले एलोन मस्क का जीवन अपने आप में एक दर्शन है. आइये मैं बताता हूँ आपको उसकी कुछ विशेष बाते.
  • परंपरागत ज्ञान का कहना है कि विश्वस्तरीय बनने के लिए, हमें केवल एक क्षेत्र पर ध्यान देना चाहिए। मस्क उस नियम को तोड़ता है उनकी विशेषज्ञता रॉकेट विज्ञान, इंजीनियरिंग, भौतिकी और कृत्रिम बुद्धि से लेकर सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रो तक है।

बड़े हो जाओ, सिर्फ एक क्षेत्र में फोकस करो सुन सुन कर बड़े होने वाले हम सभी ऐसी सफलताओं से सिर्फ अचंभित ही रह सकते हैं.

  • मस्क प्रति सप्ताह 85 घंटे काम करते हैं, वो काम के लिए पागल हैं.
  • मस्क के भाई, किंबल मस्क के अनुसार अपने शुरुआती किशोरावस्था से ही एलोन मस्क विभिन्न विषयों में प्रति दिन दो पुस्तकों को पढ़ते थे। यानी कि यदि आप एक महीने में एक किताब पढ़ते हैं, तो मस्क एक माह में आप से कई गुना ज्यादा लगभग साठ किताबें पढेंगे.
इस विचार का एक ही लब्बोलुआब है, कि आज टेक्नोलॉजी के इस संसार में जहां बहुत कुछ सीखने का संसार भरा पड़ा है, वहाँ अब मास्टर बनने के लिए अलग तरह की बैटिंग करनी होगी | मस्क ने जीवन में इसी विचार को उतारा और अपनी बौधिक सम्र्ध्यता का इस्तेमाल विभिन्न क्षेत्रों में बखूबी किया.
थोडा बहुत मैं अपने आप को भी कुछ ऐसा ही पाता हूँ, जिसके लिए जिंदगी एक ऐसी पाठशाला है, जिसमे बहुत कुछ अलग अलग विधाओं से सीखा जाना ज़रूरी है.
मैनेजमेंट करके कॉर्पोरेट में नौकरी, इंग्लिश विषय से नाता ना होते हुए भी एम् ए अंग्रेजी साहित्य को पढ़ाना, फिर गूगल भगवान की मदद से अपने आप को एक ड्राइंग शिक्षक के रूप में ढालना और प्लास्टिक आर्ट के सारे फंडामेंटल को समझना, कविताएं लिखना, थिएटर करना, वौइस् ओवर करना, और एक प्रेरक वक्ता के रूप में भी आगे बढ़ना और सफल होना कई लोगों के लिए अचम्भित करने वाली बात होगी. क्या पता कल के लिए वापस मैं फिल्मों में अपना भविष्य खोजने लगूं.

मैं कभी मास्टर ऑफ़ वन नही रहा, बस कोशिश करके पढता और सीखता रहा और बदलता रहा आज और कल को.

आगे फिर किसी नोट्स में और गहराई से आपनो जीवन के इस नए आयाम से परिचित कराऊंगा ..

तब तक पढ़ते रहिये, बढ़ते रहिये ...

आपका

अरुणेन्द्र सोनी

प्रेरक वक्ता एवं लाइफ कोच

1 Comment

Linear

  • Ram  
    Sir यहाँ भी कुछ ऐसा ही है,
    मुझे सब कुछ आता है, सब करने का मन भी करता है बस किसी एक चीज़ पे ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता लंबे समय तक!!
    क्या करना चाहिए मुझे???

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